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World (95)

नई दिल्ली(13 जनवरी): भारत को लेकर चीन थोड़ा बदला-बदला सा नजर आने लगा है। एशिया-पसिफिक सिक्यॉरिटी पर चीन के पॉलिसी डॉक्युमेंट में कहा गया है कि भारत के साथ उसके संबंध 'मजबूत' हुए हैं।

 

 

 

- बुधवार को जारी इस वाइट पेपर में कहा गया है कि चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर और वियतनाम के साथ भारत के संबंध मजबूत होने को लेकर मतभेद के बीच चीन और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति हुई है।

 

 

 

- चीन ने पाकिस्तान का जिक्र किए बिना आतंकवाद से लड़ने के बारे में इस डॉक्युमेंट में कहा है, 'चीन का मानना है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले स्थानों को समाप्त करने के लिए विभिन्न देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया बढ़नी चाहिए और इस समस्या का समाधान राजनीतिक, आर्थिक और राजनयिक जरियों के साथ होना चाहिए।

 

 

इसके साथ ही, आतंकवाद से लड़ने के लिए दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। आतंकवाद को किसी विशेष देश, नस्ल या धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए।'

 

 

 

- डॉक्युमेंट के अनुसार, '2015 से शांति और समृद्धि के लिए चीन और भारत के बीच रणनीतिक भागीदारी और सहयोग और मजबूत हुआ है। दोनों देशों ने डिवेलपमेंट के लिए भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है और वे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर एक-दूसरे के संपर्क में रहे हैं।'

 

 

 

- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली केक्विआंग के साथ कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीटिंग्स का जिक्र करते हुए डॉक्युमेंट में बताया गया है, 'दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मामलों पर संपर्क और समन्वय बरकरार रखा है और संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, जी20 में आपसी सहयोग बढ़ाया है।

 

क्लाइमेट चेंज, डब्ल्यूटीओ की दोहा राउंड की बातचीत, एनर्जी और फूड सिक्यॉरिटी, इंटरनेशनल फाइनेंशियल और मॉनेटरी इंस्टीट्यूशंस के रिफॉर्म जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग किया है। इससे चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों के साझा हितों की सुरक्षा करने में मदद मिली है।'

 

 

 

- डॉक्युमेंट में दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों में भी सुधार होने की बात कही गई है। इसमें बताया गया है, 'चीन और भारत की सेनाओं के बीच संबंध मजबूत और स्थिर रहे हैं।'

 

 

 

- चीन ने इस डॉक्युमेंट में अमेरिका, रूस, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ अपने संबंधों की भी जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि एशिया-पैसिफिक में सुरक्षा की स्थिति स्थिर है।

 

 

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नई दिल्ली ( 11 जनवरी ): बतौर राष्ट्रपति बराक ओबामा आज आखिरी बार अपने गृहनगर शिकागो में विदाई भाषण दिया। इस मौके पर उनके साथ पूरा परिवार मौजूद था। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर उनका एयरफोर्स वन में यह अंतिम सफर भी है।

 

 

अपने इस विदाई भाषण में उन्होंने उस समय का जिक्र किया है जब वह पहली बार शिकागो आए थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब वह महज बीस वर्ष के थे तब पहली बार वह शिकागो आए थे। यहां पर ही उन्हें पता चला कि उन्हें अपने जीवन में क्या करना है और इसका क्या महत्व है।

 

 

उन्होंने कहा कि इस बात का पहली बार अहसास हुआ कि उन्हें अपने में उस बदलाव को महसूस किया जिसकी बदौलत वह आज यहां पर खड़े हैं। यहां पर ही उन्हें आम लोगों के लिए आवाज उठाने और उनकी मांग के लिए लड़ना सीखा।

 

 उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर बिताए आठ वर्षों के बाद भी वह इस बात पर यकीन रखते हैं। उन्होंने कहा कि वह आज सभी देशवासियों को शुक्रिया कहना चाहता हैं। हर दिन मैंने आपसे सीखा। आप लोगों ने मुझे बेहतर राष्ट्रपति और इंसान बनाया।

 

 

 

ओबामा के भाषम के मुख्य अंश...

 

 

 

-हां, हम कर सकते हैं। हां, हमने किया। इस लाइन से उन्होंने स्पीच खत्म की।

 

 

-मैं यकीन के साथ कहना चाहता हूं कि मुझमें बदलाव लाने की क्षमता नहीं है लेकिन आप लोगों में है।

 

 

-मिशेल, आप आने वाली जेनरेशन के लिए रोल मॉडल होंगी। मुझे और देश को आप पर गर्व होगा।

 

 

-ओबामा भावुक हुए। कहा- मिशेल और मैं 25 सालों से साथ हैं। वो महज मेरी पत्नी और बच्चों की मां नहीं हैं, वे मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं। इस   दौरान मिशेल और उनकी बेटियां (साशा-मेलिया) भी भावुक हो गईं।

 

 

-मैं ये कहना चाहता हूं कि मुस्लिमों और अमेरिकियों में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

 

 

-आईएसआईएस खत्म होगा। अमेरिका के लिए जो भी खतरा पैदा करेगा, वो सुरक्षित नहीं हो सकता।

 

-ओसामा बिन लादेन समेत हजारों टेररिस्ट को हमने मार गिराया है।

 

 

-बोस्टन और ओरलैंडो में जो घटनाएं हुईं वो बताती हैं कि रेडिकलाइजेशन कितना खतरनाक है। एजेसियां इसकी जांच कर रही है।

 

 

-बीते 8 साल में किसी भी आतंकी संगठन ने तो अमेरिका पर हमले की प्लानिंग और न ही हमला किया।

 

 

-जो लोग देश को बांटना चाहते हैं, उनसे डेमोक्रेसी को खतरा है।

 

 

-हमें इमिग्रेंट्स के बच्चों के लिए इनवेस्ट करना चाहिए। क्योंकि वे भी अमेरिका की तरक्की में भागीदारी करेंगे।

 

 

 

-लंबे वक्त से यहां रह रहे लोग जानते हैं कि जातियों के रिलेशन उससे काफी बेहतर हुए हैं जो 10, 20 या 30 साल पहले थे।

 

 

-हमारी जाति (अमेरिकन) में बहुत ताकत है। लेकिन कभी-कभी विभाजनकारी ताकतें भी हावी होती हैं।

 

 

-मैं यकीन दिलाता हूं कि मेरा एडमिनिस्ट्रेशन ट्रम्प को शांति से सत्ता ट्रांसफर करेगा।

 

 

-जब मैंने पोस्ट संभाली थी, तब से लेकर अमेरिका बेहतर और मजबूत हुआ है।

 

 

-आने वाले 10 दिन में देश एक बार फिर हमारी डेमोक्रेसी की ताकत देखेगा कि कैसे एक प्रेसिडेंट-इलेक्ट सत्ता संभालता है।

 

 

-डेमोक्रेसी के लिए सबसे जरूरी चीज यूनिटी बनाकर रखना होता है। यही हमें ऊपर ले जाती है। हम गिरें या उठें, हमें साथ होना चाहिए।

 

 

-हमारे पूर्वजों ने हमें महान गिफ्ट दी है। हमारे पास इस बात की आजादी है कि हम मेहनत और लगन से अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।

 

 

-मैंने सीखा कि बदलाव तभी आता है जब सामान्य शख्स इनवॉल्व होता है और साथ आकर मांग की जाती है।

 

 

-मैंने रोज आपसे सीखा। आप लोगों ने मुझे एक अच्छा इंसान और एक बेहतर प्रेसिडेंट बनाया।

 

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नई दिल्ली (10 जनवरी): अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने उत्तराधिकारी डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा करते हुए उन्हें बेहद आकर्षक, मिलनसार और आत्मविश्वासी बताया है।

 

 

कई मायनों में उत्तराधिकारी को खुद से अलग बताते हुए कहा कि बतौर राष्ट्रपति विश्वास की कमी नहीं होना सबसे जरूरी चीज है।

 

 

 

ओबामा से ट्रंप को सराहना मिलने की यह अनूठी घटना है। एबीसी न्यूज से बातचीत में ओबामा ने कहा, 'मुझे लगता है कि वे काफी मिलनसार हैं।

 

 

उनके साथ बातचीत करने में मजा आया। उनमें विश्वास की कमी नहीं है। यह कहना सही होगा कि मैं और वह कई मायनों में अलग हैं।

 

' आठ नवंबर के आम चुनाव के बाद ओवल कार्यालय में ओबामा और ट्रंप की मुलाकात हुई थी और इसके बाद दोनों के बीच फोन पर कई बार बात हो चुकी है।

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नई दिल्ली : ईरान की इस्लामी क्रांति के महत्वपूर्ण नेता और इमाम खुमैनी व वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई के साथी और क्रांति के संघर्षकर्ता आयतुल्लाह हाशमी रफसन्जानी का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।

 

आयतुल्लाह हाशमी रफसन्जानी को रविवार की शाम  दिल का दौरा पड़ने के बाद तेहरान में अस्पताल में भर्ती किया गया था किंतु भर्ती होने के कुछ देर बाद उनका निधन हो गया।

 

निधन के तत्काल बाद ईरान के राष्ट्रपति डॅाक्टर हसन रुहानी अस्पताल पहुंचे। आयतुल्लाह हाशमी रफसन्जानी  के निधन की खबर आम होते ही लोग अस्पताल के सामने जमा हो गये और कुछ ही देर में पूरा इलाका लोगों से भर गया।

 

 आयतुल्लाह हाशमी रफसन्जानी  के शव को उनके घर पहुंचा दिया गया है और मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा । आयतुल्लाह हाशमी रफसन्जानी 25 अगस्त सन 1934 को रफसन्जान के बहरमान गांव में पैदा हुए थे।

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-गुजरात मछुआरा संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वेलजीभाई मसानी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जीवा भगवान (37) का नाम होने वाले मछुआरों की सूची में शामिल था।

 

वह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के खान गांव का रहने वाला था।

 

-बता दें कि कुछ समय पहले पाकिस्तान मैरीटाइम सिक्यॉरिटी एजेंसी (पीएमएसए) द्वारा गुजरात में जखाऊ तट के पास अरब सागर में 36 मछुआरों को पकड़ा गया था और छह नौकाएं जब्त की थी।

 

 

 

 

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नई दिल्ली : तुर्की के नाइटक्लब में नए साल की पूर्व संध्या हुए हमले के आरोपी का पता लगाने को लेकर तुर्की पुलिस अभी भी संघर्ष कर रही है. इस्तांबुल के गवर्नर वासिप साहिन ने कहा कि एक हमलावर ने देर रात करीब सवा एक बजे रीना क्लब के बाहर एक पुलिसकर्मी एवं एक आम नागरिक की हत्या कर दी, इसके बाद वह क्लब में घुसा और उसने क्लब में जश्न मना रहे लोगों पर गोलीबारी की.

 

साहिन बोले कि दुर्भाग्यवश, उसने अत्यंत बर्बर तरीके से उन निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाईं जो वहां नववर्ष मना रहे थे. स्थानीय सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक मारे गए लोगों में करीब दो तिहाई लोग विदेशी हैं जिनमें से कई पश्चिम एशिया के लोग हैं. हमले में मारे गए 25 विदेशी नागरिकों के शव आज उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे, भारत से लेकर बेल्जियम तक के देशों ने बताया कि मारे गए देशों में उनके नागरिक भी शामिल हैं.

 

हालांकि इस हमले की तत्काल किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है, इस हमले को अधिकारियों ने आतंकवादी हमला बताया है. तुर्की के अधिकारियों ने बंदूकधारी की संभावित पहचान या मकसद पर टिप्पणी नहीं की है, गृहमंत्री सुलेमान सोयलु ने कहा कि बंदूकधारी की पहचान नहीं हो पाई है और वह अभी फरार है.

 

तुर्की के प्रमुख शहर इस्तांबुल में सैंटा क्लॉज की वेष धरे बंदूकधारियों ने नाइट क्लब में अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 70 लोग घायल हुए थे. इस हमलें में दो भारतीयों की भी मौत हुई थी.

 

गौरतलब है कि तुर्की पिछले कुछ दिनों के दौरान कई आतंकी हमलों का शिकार रहा है. इससे पहले राजधानी अंकारा में रूसी राजदूत एंड्रे कार्लोफ की गोली मार कर हत्या कर दी गई. वह एक आर्ट गैलरी में एक प्रदर्शनी में भाषण दे रहे थे, तभी दंगारोधी पुलिस के सदस्य 22 वर्षीय मेवलुत मेर्त एडिन्टास ने उन पर गोलियां दाग दीं. खबरों के मुताबिक, हमले के बाद बंदूकधारी नारे लगा रहा था, 'अलेप्पो को मत भूलो, सीरिया को मत भूलो.'

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नई दिल्ली (5 जनवरी): कुछ देशों के  बेरोजगारों के लिए यह साल असल में खुशियों से भरा साबित हो रहा है।

 

फिनलैंड यूरोप का पहला ऐसा देश बन गया है जो अपने बेरोजगार नागरिकों को हर महीने 587 डॉलर यानी लगभग 40 हजार रुपये देगा।

 

 देश में गरीबी कम करने और रोजगार को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार ने यह अनोखी पहल की है। हालांकि फिलहाल इस योजना को प्रायोगिक तौर पर लॉन्च किया गया है।

 

फिनलैंड सरकार की एजेंसी केईएलए के ओली कंगस ने बताया, 'यह ट्रायल दो साल के लिए शुरू किया गया है और इसके लिए 2000 हजार बेरोजगारों को चुना गया है जिन्हें एक जनवरी से इस सुविधा का फायदा मिलेगा।'

 

 इस सुविधा को पाने वाले लोगों को यह भी बताना जरूरी नहीं है कि वे पैसा कहां खर्च कर रहे हैं। फिनलैंड के प्राइवेट सेक्टर में औसतन एक व्यक्ति हर महीने 3 हजार 500 यूरो यानी लगभग ढाई लाख रुपये कमाता है।

 

जिन्हें इस योजना के लिए चुना गया है अगर उन्हें नौकरी मिल जाती है तो भी सरकार की तरफ से बेरोजगारी भत्ता मिलना जारी रहेगा।

 

 

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नई दिल्ली : पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं के विवाह के नियमन का बहुप्रतीक्षित विधेयक 'हिंदू मैरिज बिल 2016' वास्तविकता के करीब पहुंच गया है. सीनेट की एक समिति ने इस ऐतिहासिक मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी है. करीब चार महीने पहले ही इस बिल को नेशनल असेंबली में पारित किया गया था.

 

 

हिंदू विवाह विधेयक 2016 संसद के ऊपरी सदन सीनेट में पारित होने के बाद कानून बन जाएगा. मानवाधिकार पर सीनेट की संचालन समिति ने सर्वसम्मति से बहुप्रतीक्षित हिंदू विवाह विधेयक को मंजूरी दी जिससे इसके सीनेट में पेश करने का रास्ता साफ हो गया. मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के सीनेटर नसरीन जलील के नेतृत्व में सीनेट समिति ने इस विधेयक पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी.

 

 

इस विधेयक को पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के लिए एक व्यापक और स्वीकार्य पारिवारिक कानून माना जा रहा है. इसके प्रभावी होने के बाद हिंदू समुदाय के सदस्य अपनी शादी को पंजीकृत करा सकेंगे और शादी टूटने के मामलों में अदालत में अपील कर सकेंगे. इसके मुताबिक मुसलमानों कि निकाहनामा की तरह ही हिंदुओं को भी अपने शादी के प्रमाण का दस्तावेज मिलेगा, जिसे 'शादीपरात' कहा जाएगा. विधेयक के मुताबिक तलाकशुदा हिंदुओं को फिर से शादी करने की भी इजाजत मिलेगी.

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नई दिल्ली :नए साल के स्वागत की मस्ती में हुड़दंग मचाना यूं तो आम बात है लेकिन इससे जुड़ी फ्रांस से एक चौंकाने वाली खबर आई हैृ. फ्रांस में नव वर्ष की पूर्वसंध्या पर लोगों ने उत्पात मचाते हुए 650 वाहनों को फूंक दिया. पिछले साल की तुलना में इस साल इस तरह की घटनाओं में दस फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है.

 

 

 

स्थानीय समाचार एजेंसी के अनुसार फ्रांस के प्रधानमंत्री बर्नार्ड काजेनेव ने एक रेडियो चैनल फ्रांस इंटर को दिए साक्षात्कार में सोमवार को कहा कि बीते पांच वर्षो के दौरान उत्पात की इस तरह की घटनाओं में 20 फीसदी की कमी हुई है.

 

 

 

 

 

 

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई यह नहीं बताता कि कारें जलाई जा रही हैं. पीएम ने विभिन्न विवादों में संलिप्तता को लेकर सुरक्षाबलों द्वारा 454 लोगों की गिरफ्तारी की प्रशंसा की.

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नई दिल्ली : अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को हैकिंग के माध्यम से प्रभावित करने के मामले में कड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार को रूसी खुफिया एजेंसियों और इनके शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए और 35 रूसी अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है.

 

अमेरिकी विदेश विभाग ने वाशिंगटन स्थित रूसी दूतावास और सैन फ्रांसिस्को स्थित वाणिज्य दूतावास से 35 राजनयिकों को निकाल दिया है.

इनको और इनके परिवार से 72 घंटे के भीतर अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया है. इन राजयनिकों को अपने राजनयिक स्थिति के प्रतिकूल ढंग से काम करने की वजह से अस्वीकार्य घोषित कर दिया गया है.

 

 

ओबामा ने कहा कि अमेरिका के मैरीलैंड और न्यूयॉर्क में स्थित दो रूसी सरकारी परिसरों तक अब रूस के लोगों की पहुंच नहीं होगी. साइबर हमले के मामले में ओबामा प्रशासन ने यह अब तक सबसे सख्त कदम उठाया है.

हवाई में छुट्टियां मना रहे ओबामा ने एक बयान में कहा, सभी अमेरिकियों को रूस की कार्रवाइयों को लेकर सजग होना चाहिए. इस तरह की गतिविधियों के परिणाम होते हैं.

 

ओबामा ने रूस की दो खुफिया सेवाओं जीआरयू और एफसबी के खिलाफ प्रतिबंध लगाया है. जीआरयू का सहयोग करने वाली कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया गया है.

रूसी अधिकारियों ने ओबामा प्रशासन के इस आरोप से इनकार किया है कि रूस की सरकार अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही थी.

अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस निष्कर्ष पर पहुंची हैं कि रूस का मकसद डोनाल्ड ट्रंप की जीत सुनिश्चित करना था. ट्रंप ने एजेंसियों के इस आकलन को हास्यास्पद करार दिया है. 

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